प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम 18 सूत्रीय मांगों को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को सौंपा मांगपत्र
10 दिन में मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो कलेक्टर कार्यालय का घेराव और भूख हड़ताल की चेतावनी

{ संवाददाता: अमन सिंह } झाबुआ ब्रेकिंग न्यूज़.
झाबुआ। मध्यप्रदेश के सरपंचों की विभिन्न समस्याओं एवं ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध कराने सहित 18 सूत्रीय मांगों को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से सरपंचों ने शासन से पंचायतों के अधिकार बहाल करने, लंबित राशि का भुगतान करने तथा ग्राम विकास कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग की।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि मध्यप्रदेश के सरपंचों को पदभार ग्रहण किए चार वर्ष पूर्ण हो चुके हैं, लेकिन आज भी सरपंचों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को लेकर सरपंच उत्साहित हैं और ग्रामीण जनता को भी उनसे काफी अपेक्षाएं हैं, लेकिन राशि की कमी एवं विभिन्न प्रशासनिक विसंगतियों के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
ज्ञापन में रखीं प्रमुख मांगें
पंचायत प्रतिनिधियों ने मांग की कि पंचायती राज ग्राम स्वराज व्यवस्था को पूर्व की तरह पुनः लागू किया जाए तथा सचिव एवं रोजगार सहायक की सीआर लिखने, वेतन और अवकाश स्वीकृत करने का अधिकार ग्राम पंचायत को दिया जाए। वर्तमान जनसंख्या के आधार पर पंचायतों को राशि आवंटित करने तथा 16वें वित्त आयोग और छठे राज्य वित्त आयोग की राशि उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।
इसके साथ ही 16वें वित्त आयोग की राशि में टाइड एवं अनटाइड की व्यवस्था समाप्त कर ग्राम सभा को पूर्ण अधिकार देने, पंचायतों के विकास कार्यों की स्वीकृति एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल बनाने तथा वीबी-जी राम जी योजना में भुगतान के लिए डीएससी के अधिकार जनपद स्तर से हटाकर ग्राम पंचायतों को देने की मांग की गई।
ज्ञापन में योजना के अंतर्गत ऑनलाइन हाजिरी बंद करने, मनरेगा के लंबित भुगतान एवं प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना की बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करने की मांग भी शामिल है। सरपंचों ने भारत सरकार के प्रावधानों के अनुसार ग्राम पंचायतों में 375 प्रकार के कार्य शुरू कराने की मांग करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में इन कार्यों को लेकर सीमित व्यवस्था के कारण पंचायतों को परेशानी हो रही है।
निर्माण कार्यों, मानदेय और विद्युत बिलों का मुद्दा भी उठाया
पंचायत प्रतिनिधियों ने पंचायतों के निर्माण कार्यों के लिए बजरी, पत्थर, मुरम एवं मिट्टी उपलब्ध कराने में ग्राम पंचायतों को अधिकार देने तथा अन्य विभागों के हस्तक्षेप को समाप्त करने की मांग की। सरपंचों का मानदेय 30 हजार रुपये प्रतिमाह और 5 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन निर्धारित करने की मांग भी ज्ञापन में रखी गई।
इसके अलावा मुख्यमंत्री द्वारा घोषित सरपंच स्वच्छता अनुदान निधि के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत को 50 हजार रुपये उपलब्ध कराने, वित्तीय वर्ष 2026-27 की एसओआर दरें जारी करने तथा ग्राम पंचायतों की मांग के अनुसार खेत सड़क एवं सुदूर सड़क योजना शुरू करने की मांग की गई।
ज्ञापन में विद्युत विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों से बिजली बिलों के नाम पर कथित अवैध वसूली पर रोक लगाने की मांग भी की गई। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि नल-जल योजना बंद होने के बावजूद बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। उन्होंने इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग की।
10 दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी
पंचायत प्रतिनिधियों ने ज्ञापन में कहा कि 11 नवंबर को जंबूरी मैदान में मुख्यमंत्री द्वारा उनकी मांगों पर सहमति एवं निराकरण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक संबंधित आदेश जारी नहीं हुए हैं। उन्होंने शासन से पूर्व में दिए गए आश्वासन के अनुरूप जल्द आदेश जारी करने की मांग की।
ज्ञापन के अंत में चेतावनी दी गई कि यदि 10 दिनों के भीतर मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो जिले के सभी सरपंच कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे और भूख हड़ताल पर बैठेंगे। इसकी संपूर्ण जवाबदारी प्रशासन की होगी, ऐसा ज्ञापन में उल्लेख किया गया है।
पंचायत प्रतिनिधियों ने शासन एवं प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की, ताकि ग्राम पंचायतों में विकास कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें।




